रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में आरोप है कि कुछ किसानों की जानकारी और सहमति के बिना उनकी जमीन का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीयन किए गए और बाजार से कम कीमत पर खरीदी गई मूंग को सरकारी उपार्जन केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर बेचा गया। मामले में EOW ने तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
किसानों को अपने नाम पर हुए पंजीयन की जानकारी तक नहीं थी
जांच के अनुसार रायसेन जिला सहकारी बैंक की बाड़ी शाखा के अंतर्गत आने वाली कुछ कृषक सेवा सहकारी समितियों में मूंग उपार्जन के दौरान ऐसे किसानों की जमीन का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया, जिन्होंने मूंग बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया था।
आरोप है कि जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल करते हुए पंजीयन में वास्तविक जमीन मालिक या अधिकृत कौलीदार के स्थान पर दूसरे लोगों को सिकमीदार के रूप में दर्ज किया गया। जांच में शामिल किसानों ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने न तो इस पंजीयन के लिए सहमति दी और न ही किसी को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।
बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर समर्थन मूल्य पर बेचने का आरोप
EOW की जांच में आरोप है कि बाजार और मंडी से अपेक्षाकृत कम कीमत पर मूंग खरीदी गई और इसके बाद उसे सरकारी उपार्जन व्यवस्था में समर्थन मूल्य पर बेचा गया।
जांच में वर्ष 2024-25 के लिए मूंग का समर्थन मूल्य ₹8,558 प्रति क्विंटल और वर्ष 2025-26 के लिए ₹8,682 प्रति क्विंटल बताया गया है। EOW के मुताबिक इसी अंतर का फायदा उठाकर कथित तौर पर अनुचित आर्थिक लाभ कमाया गया।
13.35 लाख रुपये के अनुचित लाभ का आरोप
EOW की जांच में तीन आरोपियों से जुड़े मामलों में कुल करीब ₹13.35 लाख के अनुचित लाभ और शासन को लगभग इतनी ही राशि की आर्थिक क्षति का प्रथम दृष्टया उल्लेख किया गया है।
जांच के मुताबिक एक आरोपी से जुड़े दो पंजीयनों के माध्यम से 151.524 क्विंटल मूंग की बिक्री दिखाई गई। इसके बदले लगभग ₹13.15 लाख का भुगतान प्राप्त होने और खरीद पर लगभग ₹4.54 लाख खर्च होने की बात सामने आई है। इसी आधार पर करीब ₹8.60 लाख के अनुचित लाभ का आकलन किया गया है।
तीन सहकारी समितियां जांच के दायरे में
मामला रायसेन जिले की बाड़ी शाखा से जुड़ी कृषक सेवा सहकारी समितियों देहरीकला, भारकच्छ कला और गूगलवाड़ा से संबंधित बताया गया है। EOW की जांच के अनुसार वर्ष 2024-25 और 2025-26 के मूंग उपार्जन के दौरान कथित अनियमितताएं हुईं।
मामले में रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर और गौरव ठाकुर समेत अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी अब पंजीयन रिकॉर्ड, बैंक खातों, जमीन के दस्तावेजों और उपार्जन से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
सरकारी उपार्जन व्यवस्था में किसानों की जमीन और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड का इस्तेमाल सीधे उनके आर्थिक हितों से जुड़ा होता है। यदि किसी किसान के नाम या जमीन का गलत तरीके से पंजीयन किया जाता है, तो उसके नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में ऐसी फसल या बिक्री दर्ज हो सकती है जिसके बारे में किसान को जानकारी ही न हो।
इस मामले ने सरकारी उपार्जन व्यवस्था में रिकॉर्ड की निगरानी, पंजीयन प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
EOW की जांच जारी
EOW ने मामले में FIR दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल आरोप जांच के अधीन हैं और किसी आरोपी को दोषी ठहराने का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
MP Prakash की नजर
रायसेन का यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें किसानों के जमीन रिकॉर्ड और सरकारी मूंग उपार्जन व्यवस्था दोनों से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। EOW की जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होगा कि फर्जी पंजीयन कैसे किए गए, इसमें और कौन लोग शामिल थे और सरकारी भुगतान की प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।
MP Prakash लगातार मध्य प्रदेश की ऐसी महत्वपूर्ण खबरों पर नजर बनाए रखेगा।